सागर तट पर बैठ अकेला रत ता तेरा नाम
कब आएगा तू गिरिधारी देर हुई घनश्याम
सागर तट पर बैट अकेला रे
सागर तट पर बैठ अकेला रत ता तेरा नाम
कब आएगा तू गिरिधारी देर हुई घनश्याम
करता पल पल तेरा वंदन
युग युग का प्यासा मेरा मान
करले अब स्वीकार मुरारी
तू ये मेरा प्रणाम
कब आएगा तू गिरिधारी डेरे हुई घनश्याम
सागर तट पर बैट अकेला रे
सागर तट पर बैठ अकेला रत ता तेरा नाम
कब आएगा तू गिरिधारी देर हुई घनश्याम
चारो ओर गिरे अंधियारा
नाथ ना अपना एक सहारा
सुधि पतवर पकड़ के था मेी
नैया कोया
कब आएगा तू गिरिधारी डेरे हुई घनश्याम
सागर तट पर बैट अकेला रे
सागर तट पर बैठ अकेला रत ता तेरा नाम
कब आएगा तू गिरिधारी देर हुई घनश्याम
बहुत हुवा ये केल तमाशा
अब तेरे चरणों की आशा
दर है दर्शन बिन जीवन की
दल जाए ना श्याम
सागर तट पर बैठ अकेला रत ता तेरा नाम
कब आएगा तू गिरिधारी देर हुई घनश्याम