पायो जी मैंने राम रतन धन पायो | Payo ji maine ram ratan dhan paye lyrics

 पायो जी मैंने राम रतन धन पायो ..


वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु किरपा करि अपनायो .


जनम जनम की पूंजी पाई जग में सभी खोवायो .


खरचै न खूटै चोर न लूटै दिन दिन बढ़त सवायो .


सत की नाव खेवटिया सतगुरु भवसागर तर आयो .


मीरा के प्रभु गिरिधर नागर हरष हरष जस गायो .


श्री रामचन्द्र कृपालु


श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम् .


नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुखकर कञ्जपद कञ्जारुणम् .. १..


कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम् .


पटपीत मानहुं तड़ित रुचि सुचि नौमि जनक सुतावरम् .. २..


भजु दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकन्दनम् .


रघुनन्द आनंदकंद कोशल चन्द दशरथ नन्दनम् .. ३..


पायो जी मैंने


पायो जी मैंने राम रतन धन पायो ..


वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु किरपा करि अपनायो .


जनम जनम की पूंजी पाई जग में सभी खोवायो .


खरचै न खूटै चोर न लूटै दिन दिन बढ़त सवायो .


सत की नाव खेवटिया सतगुरु भवसागर तर आयो .


मीरा के प्रभु गिरिधर नागर हरष हरष जस गायो .


विद्रुम से अरुण अधर बोलत मुख मधुर मधुर .


सुभग नासिका में चारु लटकत लटकनियां ..


तुलसीदास अति आनंद देख के मुखारविंद .


रघुवर छबि के समान रघुवर छबि बनियां ..




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